Abdul Kalaam childhood story in Hindi

अब्दुल कलाम जी के बचपन की एक कहानी...

नमस्ते Friends,

हमने पहले भी A.P.J. Abdul Kalaam के जीवन की सच्ची घटना पर Based Story अपने ब्लॉग पर पोस्ट की थी ये Story भी उनमें से एक है।

Second World War अभी ख़तम ही हुआ था और सभी Indians आज़ादी का इंतज़ार कर रहे थे, Radio पर अक्सर सुनाई देता था कि, देश के Indians अपना Future खुद लिखेंगे। सभी देशवासी असीम आशाओं से भरे हुए थे। छोटा Kalaam भी मन-ही-मन अपने देश के लिए कुछ करना चाहता था और इसके लिए किसी अच्छे School में पढ़ना जरूरी था लेकिन Kalaam अपने माता-पिता से ये बात कहने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। क्योंकि वह जानता था कि, वे उसे किसी अच्छे School में नहीं पढ़ा पाएँगे।

एक दिन Kalaam के पिता जी ने अचानक उससे कहा, "Kalaam मैं जनता हूँ कि, तुम मन ही मन पढ़ कर आगे बढ़ना चाहते हो, हम अनपढ़ लोग हैं लेकिन मैंने और तुम्हारी माँ ने तुम्हें लेकर बहुत सपने देखें हैं। तुम फ़िक्र मत करो जैसे भी हो हम पैसों का इंतजाम जरूर करेंगे ताकि तुम अच्छे School में पढ़ सको"। रामेश्वरम से दूर, समुद्र के पार, चहल-पहल भरे रामनाथपुरम शहर में एक School था। उस का नाम था Schwartz School। मेरे भैया मुझे वहाँ ले गये और मेर Admission वहाँ करवा दिया। वो बहुत अच्छा School था उन दिनों आज कल की तरह बिजली के पंखे नहीं होते थे। कभी-कभी Summer Season में मौसम उमस भरा होता था तो Students को पेड़ के नीचे बैठा कर पढ़ाया जाता और Period Change होने का मतलब होता था कि, भाग कर दूसरे पेड़ के नीचे जाना।

एक दिन छोटा Kalaam जल्दी में अपनी Class भूल गया और किसी दूसरी Class में चला गया वहाँ Math वाले Teacher पढ़ा रहे थे। वे गुस्से से बोले कि, "अगर तुम अपनी Class ही नहीं ढूँढ पा रहे हो तो इस School में क्या कर रहे हो? तुम्हें तो अपने गाँव लौट जाना चाहिए जहाँ से तुम आए हो। फिर उन्होंने अब्दुल की गर्दन पकड़ी और डंडे से पीटना शुरू कर दिया। उसका दिल टूट सा गया। उसे इस स्कूल में पढ़ाने के लिये उसके Parents ने बहुत Sacrifice किया था कभी-कभी उसे घर की बहुत याद आती थी लेकिन उसने ठान लिया था कि, वह अपने परिवार का नाम जरूर रोशन करेगा। उस दिन उसने निश्चय कर लिया था कि, वह सिर्फ अच्छा Student ही नहीं बल्कि सबसे अच्छा Student बन कर दिखायेगा।

वह दिन रात पढ़ाई में जुट गया और कुछ Months बाद Exams का Result आया और उसे Maths में Full Marks मिले थे। वह बहुत Excited था। Next Morning Prayer के बाद मुझे Punish करने वाले Maths के टीचर खड़े हुए और बोले, " मैं जिसे भी Punish करता हूँ वो अच्छे Marks ले कर आता है उनकी बात सुनकर सभी बच्चे हँसने लगे फिर उन्होंने पूरी बात बताई और मेरी ओर इशारा करते हुए कहा कि, मेरी बात ध्यान रखना "एक दिन ये लड़का इस School और Teachers का मान-सम्मान बढ़ाएगा"। Maths Teacher की बात सुनकर छोटा Kalaam अपने साथ हुए अपमान की कड़वाहटभूल गया।

उस Session के Over होने पर जब छोटा Kalaam अपने घर लौटा तो हमारे परिवार ने बहुत खुशियाँ मनाई, मेरी माँ ने घर पर ही मिठाई बनाई और पिताजी ने पुरे रामेश्वरम में मिठाई बाँटी, उस दिन उसे लगा वह भी किसी लायक है लेकिन अभी बहुत कुछ पाना बाकी था।

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