Lesson from Geeta... In Hindi

श्रीमद्भागवत् गीता की सीख...

नमस्ते Friends,

कुछ समय पहले मैंने गीता पढ़ना Start किया था और अभी कुछ समय पहले ही पढ़ना समाप्त किया। मुझे पढ़ने के बाद ऐसा लगा कि, गीता को जैसा लोगों ने समझा है वैसा सही नहीं है। ऐसा लगा जैसे कि, गीता में जो लिखा है लोग वैसा करते नहीं हैं और फिर भी लोग एक-दूसरे को सलाह देते हैं। मैं इस Post में वो लिखने जा रहा हूँ जो मैंने गीता पढ़ने के बाद समझा।

गीता में बहुत सी ज्ञान की बातें है जो इंसान को अपने जीवन में Implement करनी चाहिए। अगर इन सब बातों को जीवन का आधार बना लिया जाए तो आप के Successful होने के Chances बढ़ जाएँगे। मेरा मानना है कि, गीता, कुरआन, गुरुग्रंथ साहिब और बाइबिल सबमें वो ज्ञान है जो इंसान के जीवन को Easy बनाता है। फिर भी लोग आपस में Geeta, Kuraan और Bible को लेकर मतभेद उत्पन्न करते हैं। ये वही ज्ञान है जो Tura से Moses को, Bible से Jesus को और Kuraan से Prophet Mohammad को मिला। ये सभी Books किसी एक धर्म के लिए नहीं, बल्कि पूरी मनुष्य जाति के लिए हैं।

मैंने अभी-अभी कहा कि, लोग गीता को सही से नहीं समझ पाए। उस का एक Example देखिए...

गीता में लिखा है कि, Work is Worship यानि कर्म ही पूजा है और लोग फिर भी पूजा में लगे रहते हैं बहुत से अपने Important काम छोडकर। बड़े-बड़े उद्योगपति और Businessman लोग दूसरे लोगों का Time Waste करते हैं पूजा करने के चक्कर मैं। ईश्वर ने यह कभी नहीं कहा कि, आप अपने सभी काम छोड़कर मेरी पूजा करते रहो। पर Problem तो ये है कि, लोग ये जानने के बाद भी अपनी Habit बदलने को तैयार नहीं।

सबसे पहले ये बता देना चाहता हूँ कि, भगवान की Definition क्या है...?

मेरे हिसाब से भगवान को Scientific नाम Energy दे देना चाहिए क्योंकि जो Energy की Definition है वो ईश्वर के लिए बिलकुल Fit होती है। देखिए ये Energy can neither create nor destroyed. It just goes from one form to another form. मतलब साफ है कि, आत्मा ना तो पैदा होती है, ना मरती है, बस रूप बदलती है, एक Body से दूसरी Body में Transfer होती है। आप जिस God को जिस परमेश्वर को मंदिर, मस्जिद और Church में Search करते हैं वो आपने अन्दर ही है।

आजकल लोग मंदिर-मस्जिदों में अपने मतलब से ही जाते हैं। 9 दिनों का Fast रखते हैं, बहुत पूजा-पाठ करते हैं और घर के लोगों की ज़रा भी Respect नहीं करते। ये सोचने वाली बात है कि, इस तरह ईश्वर की पूजा करने का मतलब भी क्या है...???

गीता, Kuraan और Bible में साफ-साफ लिखा है कि, हमें अच्छे कर्म करने से स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है फिर भी एक-दूसरे से जलते हैं, दूसरे के सुख से ही Problem होने लगी है और ये भी लिखा है कि, व्यक्ति को झूठ नहीं बोलना चाहिए, चोरी नहीं करना चाहिए, सभी धर्मों का सम्मान करना और किसी को दुःख नहीं पहुँचाना...

क्या आपको लगता है कि, ये सभी Qualities आप के अन्दर हैं. हाँ बिलकुल हैं पर हम इनको Life में उतार नहीं पाए। इंसान इंसानियत को छोड़ कर भगवान् बनना चाहता है। जहाँ पर CCTV Camera लगा होता है वहाँ हम बहुत अच्छे से Behave करते हैं और ये बात हम सभी अच्छी तरह जानते हैं कि, भगवान् की नज़र हम पर हर पल रहती है फिर भी हम सिर्फ Cameras से ही डरते हैं , भगवान से नहीं।

मैं इस Post के माध्यम से से आपको गीता सार नहीं बताना चाहता। मैं सिर्फ यह चाहता हूँ कि, आप भी इन सभी बातों को समझें और कुछ बातों को Life में Implement करें। हालाँकि इन सब बातों को Base बनाना इतना सरल नहीं पर Try करने से ही किसी भी कठिन काम को सरल बनाया जा सकता है।

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