Unity is the strength

Unity is the strength

एकता ही शक्ति है...



Ekta hi Shakti Hai...
एक बार हाथ की सभी उँगलियों में लड़ाई हो गई। 

अँगूठा बोला, मैं सबसे बड़ा हूँ। सभी जगह जरूरी कागजों पर मुझ से ही निशान लगाया जाता है। 

अँगूठे के साथ वाली ऊँगली बोली मैं बड़ी हूँ, मेरे होने से ही सब लोग आसानी से काम कर पाते हैं, जैसे लिखना पढ़ना और पकड़ना आदि। 



इतने में बीच की सबसे बड़ी वाली ऊँगली बोली, अरे भाई क्या तुम नहीं जानते जो आकर में बड़ा होता है उसे ही सब बड़ा मानते हैं। 

बड़ी ऊँगली के साथ वाली अंगुली ये सब सब कुछ सुन रही थी वह भी तुरंत बोल पड़ी मैं ही सब से बड़ी हूँ क्योंकि मुझसे ही सब पूजा पाठ के काम सम्पन्न किए जाते हैं, मुझ से ही तिलक भी लगाया जाता है।



छोटी ऊँगली सभी को लड़ता देख कर, यह सुनकर वह चुपचाप एक कोने में उदास थी, तभी अँगूठा और तीनों उंगलियाँ उनके पास जा कर बोली, अरे छोटी तुम तो कैसे भी बड़ी हो ही नहीं सकती क्योंकि तुम तो आकर में हम सब से बहुत छोटी और तुम्हारा तो नाम भी छोटी ऊँगली है।

छोटी ऊँगली बोली- सुनो अँगूठे भाई और प्यारी उँगलियों- आपस में लड़कर कभी किसी का भला नहीं हुआ, हम में से कोई भी बड़ा छोटा नहीं है, हम सब मिलकर एक मुट्ठी बन सकते हैं, तभी हम सब बलवान होंगे, क्या तुम्हें नहीं पता कि, बंद मुट्ठी में ही ताकत होती है।

छोटी ऊँगली की बात सुनकर सभी एक साथ बोले हाँ-हाँ छोटी बहन तुम बिलकुल ठीक कह रही हो, सचमुच अक्ल में तो तुम हम सब से बड़ी ही हो।

Friends देखा जाए तो ये एक बच्चों की कहानी की एक moral story लग रही है लेकिन अगर थोड़ा सा ध्यान दिया जाए तो इस एक बड़ा message छिपा हुआ है। हम आज बड़े तो हो गए हैं लेकिन क्या इस बात की भी कोई guarantee है कि हम अब fully matured हो चुके हैं। अब कोई गलती नहीं करेंगे। क्या कोई समझदारी की percentage बताने वाला कोई फार्मूला बना है। 

भारत का इतिहास उठा कर देख लो लड़ाई से किसी का भी profit नहीं हुआ और फिर भी हम इस बात को समझ नहीं पाए। Situation कितनी भी critical क्यों न हो, बात करने से सब ठीक हो ही जाता है क्योंकि इस दुनिया के हर problem का कुछ न कुछ solution तो है ही बस उस तक पहुँचने की देर है।



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