An Interesting Incident of Tansen's Life

तानसेन के जीवन का एक सत्य किस्सा...

आप सब ने Tansen का नाम तो सुना ही होगा। हमारे India के सबसे अच्छे संगीतकार (Musician) का नाम Tansen था। इनके पिता मुकुन्दन मिश्र और माँ ग्वालियर में रहते थे। 



Tansen उनका इकलौता पुत्र था। Tansen बचपन में बहुत Naughty थे। वह बचपन में जंगलों में निकल जाया करते थे और जल्दी ही उन्होंने जानवरों और पक्षियों की आवाज़ निकलना सीख लिया था।

एक बार प्रसिद्ध संगीतकार स्वामी हरिदास अपने शिष्यों के साथ जंगल से गुज़र रहे थे। वह चलते-चलते थक गए और किसी वृक्ष के नीचे बैठ गए। तानसेन ने वहाँ उन सभी को देख लिया और उनके दिमाग में उन्हें डराने का Idea आया। Tansen पेड़ के पीछे छिप कर शेर के जैसे दहाड़ने लगा, स्वामी हरिदास के शिष्य डर गए लेकिन हरिदास ने उन्हें बताया कि, शेर हमेशा ही हमला नहीं करते, डरने की कोई बात नहीं है। जल्दी ही उनमें से किसी एक शिष्य ने Tansen को पेड़ के पीछे देख लिया और उसे पकड़ लिया।

स्वामी हरिदास ने उन्हें Punish नहीं किया लेकिन वह Tansen को उन्हें पिता के पास ले गए और कहा आपका पुत्र बहुत ही Naughty है और Multi Talented भी है इसकी आवाज़ भी बहुत अच्छी है, मैं जरूर इसे एक अच्छा Singer बना दूँगा।




Tansen उस समय केवल 10 साल का ही था जब वह स्वामी जी के साथ चल दिया। उनके साथ 11 साल तक Music सीखता रहा और वह एक बड़ा Singer बन गया। इसके बाद उनके Parents गुज़र गए। उनके Father मुकुन्दन मिश्र की Dying Wish थी कि, Tansen अपने जीवन में एक बार ग्वालियर जा कर मोहम्मद गौस से जरूर मिले। Mohd. Gause एक अच्छा शासक था और मुकुन्दन मिश्रा बहुत समय उनके दरबार में रहे थे।

Tansen जब मोहम्मद गौस से मिलने ग्वालियर गए तो उन्हें रानी मृगनयनी के दरबार में ले जाया गया जो कि, स्वयं एक अच्छी Musician थीं। वहाँ उनकी मुलाकात हुसैनी से हुई और जल्द ही उनका विवाह भी हो गया। अब हुसैनी भी स्वामी हरिदास की शिष्या बन गई। तानसेन को शादी के बाद 5 पुत्र हुए और सभी संगीत में अच्छे थे। Tansen इस समय तक बहुत ही Famous जो गए थे। 1556 में वे अकबर के दरबार में भी गए अकबर उनके Music से इतने खुश हुए कि, उन्होंने Tansen को अपने दरबार में रख लिया और अपने 9 रत्नों में शामिल कर लिया। जिस कारण अकबर के दरबार में शौकत मियाँ और अन्य कुछ दरबारी Tansen से जलने लगे थे।

एक दिन शौकत मियाँ ने Tansen को नीचा दिखने का एक Plan बनाया। उनके Plan के अनुसार Tansen अगर राग दीपक गाता है तो वह खुद ही मर जाएगा, क्योंकि राग दीपक को अगर सही से गया जाए तो हवा और पानी इतने गर्म हो जाते हैं कि, उसे गाने वाला Singer ही अपनी जान से हाथ धो बैठता है। 





शौकत मियाँ अकबर के दरबार में गए और कहा हमें नहीं लगता Tansen इतने महान हैं कि, वह राग दीपक गा सके Tansen का एक बार Test लेना चाहिए केवल एक महान Singer ही राग दीपक को अच्छी तरह से गा सकता है... अकबर ने Tansen को राग दीपक गाने के लिए कहा... Tansen ने उनकी आज्ञा मान तो ली लेकिन मन ही मन थोड़ा डर भी गए थे Tansen ने अकबर से राग दीपक को गाने के लिए कुछ समय माँगा और अपने घर चले गए।
Tansen आज से पहले इतने चिंतित कभी नहीं हुए क्योंकि This was the Toughest Challenge for the Great Singer Like Tansen. 
अपनी पत्नी हुसैनी से यह बात बताई और कहा कि, मैं अगर राग दीपक गाता हूँ तो यह न केवल सभी दीपक जला देगा, साथ साथ यह मुझे भी जला कर राख कर देगा। तब Tansen को एक Idea आया। अगर कोई उसी Time राग मेघ सही गाये तो इससे बारिश आ जाएगी और हमारी पुत्री सरस्वती और उसकी मित्र रूपवती इसे गा सकती है। तब Tansen सरस्वती और रूपवती को राग मेघ की Practice करवाने लगे। उन्होंने पूरे 2 सप्ताह दिन रात मेहनत की और दोनों को बताया कि, जैसे ही सभी दीपक जल जाएँ। उस के बाद आपको राग मग गाना होगा और फिर वह दिन भी आ गया। सभी दरबारी Tansen से राग दीपक सुनना चाहते थे। 

Tansen ने गाना Start किया जैसे ही Tansen ने गाना Start किया हवा गर्म होने लगी, जल्दी ही सभी दरबारी पसीने में नहा गए, पेड़ के पत्ते सूख कर धरती पर गिर गए लेकिन Tansen गाते रहे। पक्षी भी धरती पर गिरने लगे क्योंकि इतनी गर्मी हो गई थी कि, नदियों का पानी भी उबलने लगा था। पूरे नगर में लोग यहाँ-वहाँ भाग रहे थे, क्योंकि नगर में आग लग गई थी और अंत में दीपक भी जल गए और दीपक के जलते ही सरस्वती और रूपवती ने राग मेघ गाना Start कर दिया और धीरे-धीरे आसमान में बादल छा गए और बारिश Start हो गयी। 





Tansen की ज़िन्दगी बच गई और उनके दुश्मनों की हार हुई। अकबर ने इस घटना के बाद Tansen से क्षमा माँगी और उसके दुश्मनों को सजा दी। Tansen 1585 तक अकबर के दरबार में रहा। अपने जीवन में Tansen ने और भी कई राग बनाए...

Tansen का मकबरा (Tomb) Gwalior में है और यह जगह संगीतकारों का तीर्थकर (Pilgrimage) कहलाती है।



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2 comments

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March 15, 2017 at 5:41 PM delete

thanks pradeep yaday ji for your support

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