Geeta Shlok With Meaning in Hindi

Geeta Shlok With Meaning in Hindi and English...



भागवत गीता की सही होती बातें...


गीता में लिखी ये 10 भयंकर बातें कलयुग में हो रही हैं सच...





1. दाम्पत्येऽभिरुचि र्हेतुः मायैव व्यावहारिके ।
स्त्रीत्वे पुंस्त्वे च हि रतिः विप्रत्वे सूत्रमेव हि ॥

इस श्लोक का अर्थ है कि कलयुग में स्त्री-पुरुष बिना विवाह के केवल रुचि के अनुसार ही रहेंगे व्यापार की सफलता के लिए मनुष्य छल करेगा और ब्राह्मण सिर्फ नाम के होंगे



These lines means that in modern time men and women may remain unmarried as their interest. person will deceive in order to get succeed in business and bhraman will only be in caste.



2.ततश्चानुदिनं धर्मः सत्यं शौचं क्षमा दया ।
कालेन बलिना राजन् नङ्‌क्ष्यत्यायुर्बलं स्मृतिः ॥

इस श्लोक का अर्थ है कि, कलयुग में धर्म, स्वच्छता, सत्यवादिता, स्मृति, शारीरक शक्ति, दया भाव और जीवन की अवधि दिन-ब-दिन घटती जाएगी



This stanza means that in 21st century, religion, cleanliness, truth, memories and physical power, feeling of pity will continue to decrease day by day.

3.वित्तमेव कलौ नॄणां जन्माचारगुणोदयः ।
धर्मन्याय व्यवस्थायां कारणं बलमेव हि ॥

इस गीता के श्लोक का अर्थ है कि, कलयुग में वही व्यक्ति गुणी माना जाएगा जिसके पास ज्यादा धन है न्याय और कानून सिर्फ एक शक्ति के आधार पे होगा



These lines from Geeta means that in modern time a person who has more wealth will be consider as the most valuable person on the basis of justice and law


4. लिङ्‌गं एवाश्रमख्यातौ अन्योन्यापत्ति कारणम् ।
अवृत्त्या न्यायदौर्बल्यं पाण्डित्ये चापलं वचः ॥

इस श्लोक का अर्थ है कि घूस देने वाले व्यक्ति ही न्याय पा सकेंगे और जो धन नहीं खर्च पाएगा उसे न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खानी होंगी स्वार्थी और चालाक लोगों को कलयुग में विद्वान माना जाएगा



This shlok means that a person who can offer bribe will be eligible for justice and the person who has no money will have to wondar here and there. foolish and clever people will be superior in the kalyug.

5. क्षुत्तृड्भ्यां व्याधिभिश्चैव संतप्स्यन्ते च चिन्तया ।
त्रिंशद्विंशति वर्षाणि परमायुः कलौ नृणाम

इस श्लोक का अर्थ है कि, कलयुग में लोग कई तरह की चिंताओं में घिरे रहेंगे लोगों को कई तरह की चिंताएँ सटाएँगी और बाद में मनुष्य की उम्र घटकर सिर्फ 20-30 साल की रह जाएगी

This means that in kalyug people get engaged with many sorts of problems. many other problems will bother man and his age will be decreased to 20-30 years only.



6. दूरे वार्ययनं तीर्थं लावण्यं केशधारणम् ।
उदरंभरता स्वार्थः सत्यत्वे धार्ष्ट्यमेव हि॥

इस श्लोक का अर्थ है कि, लोग दूर के नदी-तालाबों और पहाड़ों को तीर्थ स्थान की तरह जाएँगे लेकिन अपनी ही माता-पिता का अनादर करेंगे सर पे बड़े बाल रखना खूबसूरती मानी जाएगी और लोग पेट भरने के लिए हर तरह के बुरे काम करेंगे



People will search god far at mountain, in river and ponds and disrespect their parents. long hair will be the symbol of beauty and people will do wrong deeds in order to eat.

7. अनावृष्ट्या विनङ्‌क्ष्यन्ति दुर्भिक्षकरपीडिताः ।
शीतवातातपप्रावृड् हिमैरन्योन्यतः प्रजाः ॥



इस श्लोक का अर्थ है कि, कलयुग में बारिश नहीं पड़ेगी और हर जगह सूखा होगा मौसम बहुत विचित्र अंदाज़ ले लेगा कभी तो भीषण सर्दी होगी तो कभी असहनीय गर्मी कभी आँधी तो कभी बाढ़ आएगी और इन्हीं परिस्थितियों से लोग परेशान रहेंगे

These lines means in kalyug there will be no rainfall and weather will be strange. sometimes there will be biting cold and sometimes there will be too hot, sometimes storms and sometimes flood will bother peoples.



8. अनाढ्यतैव असाधुत्वे साधुत्वे दंभ एव तु ।
स्वीकार एव चोद्वाहे स्नानमेव प्रसाधनम् ॥

इस श्लोक का अर्थ है कि, कलयुग में जिस व्यक्ति के पास धन नहीं होगा उसे लोग अपवित्र, बेकार और अधर्मी मानेंगे विवाह के नाम पे सिर्फ समझौता होगा और लोग स्नान को ही शरीर का शुद्धिकरण समझेंगे

In kalyug a person who does not have money will be considered as good for nothing and anti religious. marriage will be just a business and by taking bath people will clean their mind and soul.

9. दाक्ष्यं कुटुंबभरणं यशोऽर्थे धर्मसेवनम् ।
एवं प्रजाभिर्दुष्टाभिः आकीर्णे क्षितिमण्डले ॥



इस श्लोक का अर्थ है कि, लोग सिर्फ दूसरों के सामने अच्छा दिखने के लिए धर्म-कर्म के काम करेंगे कलयुग में दिखावा बहुत होगा और पृथ्वी पर भ्रष्ट लोग भारी मात्रा में होंगे लोग सत्ता या शक्ति हासिल करने के लिए किसी को मारने से भी पीछे नहीं हटेंगे

People will do good and religious deed to show himself a good person. show off will be the first priority of the people. most of the people will be corrupt and people may kill anyone in order to kill anyone.

10. आच्छिन्नदारद्रविणा यास्यन्ति गिरिकाननम् ।
शाकमूलामिषक्षौद्र फलपुष्पाष्टिभोजनाः ॥

इस श्लोक का अर्थ है कि, पृथ्वी के लोग अत्यधिक कर और सूखे के वजह से घर छोड़ पहाड़ों पे रहने के लिए मजबूर हो जाएँगे कलयुग में ऐसा वक़्त आएगा जब लोग पत्ते, माँस, फूल और जंगली शहद जैसी चीज़ें खाने को मजबूर होंगे

This shlok means in near future people of earth will start leaving on mountains because of hunger problem and the time will come when people will have to eat leaves, flesh, flowers and wild honey etc.



गीता में श्री कृष्णा द्वारा लिखी ये बातें इस कलयुग में सच होती दिखाई दे रही हैं 

इन सब श्लोकों से साफ़-साफ़ पता चलता है कि, मनुष्य अपने ही विनाश की और बढ़ रहा है और वो दिन दूर नहीं जब इंसान के लिए संसाधन ही समाप्त हो जाएँगे. हम nature से इतनी छेड़-छाड़ कर चुके हैं कि, अब nature का भी दम घुटने लगा है अपने स्वार्थ के लिए जंगल हम काटते ही जा रहे हैं, ज़मीन से खोद-खोद कर तेल हम निकालते ही जा रहे हैं अपने आस-पास के वातावरण को हम दूषित करते जा रहे हैं अब जल्द ही market में oxygen mask आ जाएँगे और हमें शुद्ध हवा लेने के लिए भी machines पर depend होना पड़ेगा
हम सबको ये समझना होगा कि, इन सब को रोका नहीं गया तो हमारा विनाश निश्चित है

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।।।धन्यवाद।।।

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