Mandbuddhi Logon ki Nishaniyaan in Hindi


मंद बुद्धि लोगों की निशानियाँ और हम उनसे कैसे बचें?

Mandbuddhi Logon ki Nishaniyaan in Hindi...


अगर हम हमारे आस-पास रहने वाले लोगों के बारे थोड़ा और गहराई से सोचें तो हमें यह पता चलता है कि, इनमें से बहुत सारे लोग भीड़ के पीछे चलने वाले मिलते हैं। यह लोग हमारे बीच बिछाई गई व्यवस्था और प्रणालियों में बेहद बखूबी तरीके से जीते हैं। यह लोग ऐसा इसलिए करते हैं ताकि वे सुखी और सुरक्षित रह सकें जो कि, एक गलत फहमी है (कब जाने कहीं से कोई बड़ा पत्थर आकर हमारी धरती से टकरा जाए और पृथ्वी तबाह हो जाए।)



पर क्या हम भी इन्हीं की तरह आज्ञाकारी बन कर भीड़ के पीछे चलते रहें? निस्संदेह, हमारा जवाब होता है नहीं। तो अगर इस भीड़ भरे लोगों के पीछे नहीं चलना हो तो हमें क्या करना चाहिए? इस प्रश्न का उत्तर पाने के लिए हमें सबसे पहले इस व्यवस्था में चलने वाले लोगों की निशानियों को पहचानना आवश्यक है ताकि हम भी ऐसा करने से बचें।

1. दिल और दिमाग चलाना मना है...

सुखी, सुरक्षित और संतुष्ट रहने के लिए ज्यादातर लोग जैसे उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है वे उसी प्रकार से जीते हैं। 
उदाहरण के तौर पर एक इंसान को यह सिखाया जाता है कि, “तुम गाने के बजाय तुम्हारी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दो ताकि तुम्हें अच्छी नौकरी मिले और तुम सुखी और सुरक्षित जिंदगी जी सको। “बड़ा होकर नौकरी करते समय वही इंसान अगर किसी को दिल से गाना गाते देखे तो मन ही मन वह इंसान रोता है। उसे गाना गाने की बहुत इच्छा होती है पर वह ऐसा नहीं कर पाता क्योंकि उसे उसके परिवार और उसके नौकरी की चिंता होती है।
क्या ऐसी जिंदगी जीना सही है?


2. खुद ही को बिगाड़ना...

हमारे बीच बिछाए गए जालों में ज्यादातर लोग सहजता से फँस जाते हैं। यह जाल आकर्षित करते हैं उनके ईगो को, उनके स्वाद कलिका को और उनकी खुशी और सहूलियत को। इन जालों में वे अनजाने में फँसते चले जाते हैं।
उदाहरण के तौर पर एक साहब हैं जो बाहर का अस्वस्थ खाना बहुत ज्यादा मात्रा में खाते जा रहे हैं और इनका पेट फूलता ही जा रहा है। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि, बाहर का खाना नहीं खाना चाहिए, मेरा सिर्फ यह कहना है कि, अस्वस्थ खाना ज्यादा खाने से पेट में चर्बी बढ़ती ही जाएगी और पेट फूलते ही जाएगा।
क्या इन जालों में फँसते रहना सही है?


3. खुद की प्रतिमा को किसी और प्रतिमा से जोड़ कर देखना...

कभी-कभी हमारा टीवी या फिर इंटरनेट हमें यह दिखाता है कि, अगर आपको बेहतर इंसान बनना है तो आपके पास कुछ चीजों का होना आवश्यक है।
उदाहरण के तौर पर बहुत से नौजवान युवाओं को यह दिखाया जाता है कि, अगर आपको सेहतमंद रहना है तो आपको जिम जॉइन करना पड़ेगा। वास्तविक तौर पर सेहतमंद रहने के लिए जिम ही जॉइन करना आवश्यक नहीं। आप संतुलित आहार खाकर और नियमित तौर पर व्यायाम या योग करके भी बहुत अच्छी तरह से स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
क्या इसी प्रकार खुद की प्रतिमा को किसी और प्रतिमा से जोड़ना सही है?



उपर दिए गए तीनों उदाहरणों के प्रश्नों का जवाब अगर नहीं है तो इसका यही मतलब है कि, हमें इन चीजों से बचना पड़ेगा।

इंसान इस धरती पर सबसे अकलमंद और सबसे बलवान जीव है और अगर हम गुलामों की तरह इन चीजों के पीछे चलते रहे तो हमारा सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि, हम खुद ही को खो बैठेंगे। पृथ्वी पर रहने वाला प्रत्येक जीव एक आजाद घूमने वाले पंछी की तरह है और इसी कारण एक मंद बुद्धि जीव बनकर रहने में हमारी कोई भलाई नहीं। पर अगर हम खुद का महत्व समझकर, खुद ही बनाए गए एक बेहतरीन रास्ते पर चलते रहे तो हम सही तरह सफल व्यक्ति बन सकते हैं। 

हमारे खुद के बनाए रास्ते पर चलना थोड़ा कठिन है, लोग हमें नापसंद करने लगेंगे, वे हमें नासमझ कहते रहेंगे और शायद वे हमसे दूर जाने लगेंगे। पर अगर हम खुद में छुपे उस जादूगर को पहचानें और उस जादूगर का सबसे अच्छा दोस्त बनें तो हम इस दुनिया के सबसे बेहतरीन इंसान बन सकते हैं। असम्भव शब्द भी हमारे लिए एक खेलमात्र चीज बनके रह जाएगी।



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