16 October History in Hindi

16 अक्टूबर का इतिहास...


 ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 16 अक्टूबर वर्ष का 289 वाँ (लीप वर्ष में यह 290 वाँ) दिन है। साल में अभी और 76 दिन शेष हैं।

16 अक्टूबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ...


1905 - लार्ड कर्जन द्वारा बंगाल का प्रथम विभाजन।

1939 - द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी ने ब्रिटिश क्षेत्र पर पहला हमला किया।

1951 - पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की रावलपिंडी में गोली मारकर हत्या की गई।

1959 - राष्ट्रीय महिला शिक्षा परिषद की स्थापना।

1964 - चीन ने अपना पहला परमाणु विस्फोट किया।

1968 - हरगोविंद खुराना को चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

1984 - दक्षिण अफ्रीका के सामाजिक कार्यकर्ता डेसमंड टुटु को शांति के लिये नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

1996 - ग्वाटेमाला की राजधानी ग्वाटेमाला सिटी में फुटबॉलल मैच के दौरान स्टेडियम में क्षमता से अधिक लोगों के पहुँचने के कारण मची भगदड़ में 84 लोगों की मौत,180 से अधिक घायल।

1999 – संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने सैन्य शासन के विरोध में पाकिस्तान पर प्रतिबन्ध लगाया।

2002 - 14वें एशियाई खेलों में एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक विजेता डोपिंट टेस्ट में असफल रहने के बाद भारत की सुनीता रानी का पदक छीना गया।

2003 - मलयाली फ़िल्मकार अडूर गोपाकृष्णन को फ़्रांस का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'कमांडर आफ़ द आर्डर आफ़ आर्ट्स एंड लैटर्स' दिया गया।

2004 - दारफुर में मरने वालों का आँकड़ा 70,000 तक पहुँचा। अमेरिका ने इराकी अबू मुसार जल जरकावी के संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित किया।

2005 - जी-20 देश वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ़ में सुधार हेतु एकमत।

2012 - सौर मंडल के बाहर एक नये ग्रह ‘अल्फा सेंचुरी बीबी’ का पता चला।

2013 - दक्षिण पूर्वी एशियाई देश लाओस के पाक्से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने से कुछ देर पहले लाओ एयरलाइंस के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से 49 लोगों की मौत।

16 अक्टूबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव...


राष्ट्रीय विधिक सहायता दिवस (सप्ताह),
विश्व खाद्य दिवस,

विश्व एनेस्थीसिया दिवस,

कान्हा राष्ट्रीय उद्यान


16 अक्टूबर को जन्मे व्यक्ति...

1896 - सेठ गोविन्द दास - सेनानी, सांसद तथा हिन्दी के साहित्यकार थे।

1944 - लच्छू महाराज - भारत के जानेमाने तबला वादक।
1948- हेमा मालिनी- प्रसिद्ध अभिनेत्री और भरतनाट्यम् की नृत्यांगना।

1948- नवीन पटनायक- ओडिशा के 14वें मुख्यमंत्री बने।

1905- विनय मोहन शर्मा (पं. शुकदेव प्रसाद तिवारी)- प्रसिद्ध लेखक एवं आलोचक।

1995 - वेद कृष्णमूर्ति - भारतीय महिला क्रिकेटर।

16 अक्टूबर को हुए निधन...


1938 - प्रभाशंकर पाटनी - गुजरात के प्रमुख सार्वजनिक कार्यकर्त्ता थे।

1951 - लियाक़त अली ख़ाँ - पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री।

1994 - गणेश घोष - भारतीय स्वतंत्रता सेनानी।

विश्व खाद्य दिवस: 16 अक्टूबर


विश्व खाद्य दिवस प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दिवस खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) का स्थापना दिवस है। एफएओ को संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट संस्था के तौर पर 16 अक्टूबर 1945 को रोम में स्थापित किया गया था।

इस दिवस को मनाने का उद्देश्य भुखमरी की चुनौतियों के बारे में जनता में जागरुकता प्रसारित करने के साथ-साथ लोगों को भूख के खिलाफ़ संघर्षमय कार्यवाही करने के लिए प्रेरित करना है।

थीम (विषय):

संयुक्त राष्ट्र के अंग खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने वर्ष 2030 तक विश्व को भुखमरी मुक्त रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है और वर्ष 2017 की मुख्य विषयवस्तु 'प्रवास का भविष्य बदलें, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास में निवेश करिए' (Change the future of migration. Invest in food security and rural development) रखी गई है।

वर्ष 2016 के लिए इस दिवस का विषय ‘जलवायु बदल रही है। भोजन और कृषि को भी ज़रूर बदलना चाहिए’ है।

विश्व खाद्य दिवस के मुख्य उद्देश्य:


सभी राष्ट्रों में भूख, कुपोषण एवं गरीबी के खिलाफ़ संघर्ष करने के लिए जागरुकता एवं प्रोत्साहन प्रसारित करना। कृषि विकास पर ध्यान केंद्रित करना। कृषि खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देना। अधिकांश विकासशील देशों के बीच आर्थिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना। ग्रामीण लोगों मुख्यत: महिलाओं एवं कम विशेषाधिकार प्राप्त लोगों को उनके योगदान करने के लिए प्रेरित करना। विकासशील देशों के बीच प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना।

इस दिन का मुख्य फोकस इस बात पर है कि, भोजन एक आधारभूत और बुनियादी मौलिक अधिकार है फिर भी विश्व में 80.5 करोड़ लोग दीर्घकालिक भुखमरी का शिकार हैं और 60 प्रतिशत महिला आबादी तथा 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 50 लाख बच्चे रोजाना कुपोषण जनित रोगों के कारण मौतों का शिकार हो रहे हैं।

टिप्पणी:


पूरे विश्व में इस समय अजीब माहौल है और बढ़ते आपसी संघर्षों तथा राजनीतिक अस्थिरता की वजह से घर छोड़कर अन्य क्षेत्रों में प्रवास करने की प्रवृति द्वितीय विश्व युद्ध के मुकाबले कहीं अधिक है।

पूरे विश्व को प्रवास की समस्या से सामना करना पड़ रहा है और इसमें भुखमरी, गरीबी और बदलती मौसमी परिस्थितियों का भी योगदान है। रोजाना हो रहे प्रवास से जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे देखते हुए वैश्विक स्तर पर कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

गरीब आबादी का तीन चौथाई हिस्सा कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी गतिविधियों में संलग्न है और बढ़ते प्रवास को रोकने का एकमात्र उपाय यही हो सकता है कि, युवा आबादी को उनके गाँवों या आस-पास के क्षेत्रों में रोजगार जैसी सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए ताकि वे सुरक्षित महसूस कर सकें।

ग्रामीण विकास के क्षेत्र में निवेश से अंतरराष्ट्रीय जगत प्रवास की समस्या को काफी हद तक हल कर सकता है तथा विस्थापित एवं बेघर हो चुके लोगों की समस्या का हल निकाल सकता है।

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