Planet mercury explained in hindi

Planet Mercury Explained In Hindi...

बुध ग्रह पर जीवन क्यों नहीं है...? 


बुध ग्रह: हमारे सौर माला का सबसे पहला और सबसे छोटा ग्रह, यह हमारे चाँद से भी थोड़ा छोटा है। इसमें भी Earth की ही तरह सतह है और वायुमंडल है। Technically Mercury पर भी जीवन होना चाहिए क्योंकि जो Greenhouse Gases हमारी पृथ्वी पर है वह ही Mercury पर भी है लेकिन सूर्य के बहुत पास होने के कारण इसका Temperature बहुत अधिक हो जाता है जिस वजह से यहाँ जीवन नहीं है। आइए Mercury में बारे में कुछ Detail से जानते हैं…


Fact About Planet Mercury In Hindi




- बुध ग्रह का नामकरण रोम मिथकों के अनुसार व्यापार और यात्रा करने वाले देवता "बुध" के नाम पर रखा गया।


- बुध ग्रह यह हमारे सौर मंडल का सबसे छोटा और सूर्य से सबसे करीब रहने वाला ग्रह है।

- बुध ग्रह यह सूर्य के आसपास अपनी एक परिक्रमा लगभग 88 दिनों में पूरी करता है।

- बुध ग्रह खुद की परिक्रमा 59 दिनों में पूरी करता है।

- बुध ग्रह से सूर्य का अंतर 4,60,00,000 से 7,00,00,000 किलोमीटर के बीच है।

- बुध ग्रह का रेडियस लगभग 2,439 किलोमीटर है।

- बुध ग्रह का वज़न 3.3 X 1023 किलो है।

- बुध ग्रह का निम्नतम तापमान 100 K व उच्चतम तापमान 700 K है।

- बुध ग्रह का वातावरण बहुत कम होने के बावजूद भी 42% Molecular Oxygen, 29% Sodium, 22% Hydrogen, 6% Helium, और बाकी वायु द्रव्य से भरा हुआ है।

- बुध ग्रह का अक्ष (Axis) सिर्फ 1/30 डिग्री तक ही झुका हुआ है, जो की बाकी ग्रहों में से सबसे कम है।

- बुध ग्रह की सतह अधिकतम गड्ढों से भरी हुई है।




Inner Core Of Planet Mercury
बुध ग्रह की अंदरूनी और सतह की दुनिया


- बुध ग्रह यह सौर मंडल के चार भौमिक ग्रहों में से एक है।

- बुध ग्रह यह 70% धातु एवं 30% सिलिका से बना है।

- बुध ग्रह की Density 5.427 G/Cm3 है, जो की सौर मंडल में दूसरा सबसे ज्यादा घनत्व रहने वाला ग्रह है।

- बुध ग्रह केन्द्र भाग ज्यादातर पिघले हुए लोह से बना हुआ है।

- बुध ग्रह का केन्द्र भाग उसके घन फल से 55% का बना हुआ है, जिसका उपरी हिस्सा 500-700 किलोमीटर Silica से बना हुआ Mantle है।

- बुध ग्रह की बह्यापटल /खाल/Crust यह 35 किमी घनिष्ठ है।

- बुध ग्रह के निर्माण के दौरान उसका वातावरण पथरीली भाँपो से बना हुआ था जिसका तापमान 2,500 K से 3,500 K के बीच में था। जिसके बाद सूर्य के सौर तूफान के वजह से यह पथरीली भाप उड़ गई और धीरे-धीरे ठंडी होते हुए बुध ग्रह की पथरीली सतह बनती गई।

- बुध ग्रह के बड़े ज्वालामुखी विवरों के नामकरण गायकों, लेखकों, चित्रकारों के नाम पर किए जाते हैं।

- बुध ग्रह पर ज्वालामुखी विवरों का आकर छोटे से कटोरे से लेकर हजारों किलोमीटर बड़े विवरों तक स्थित है।

- बुध ग्रह का सबसे बड़ा विवर 1550 किलोमीटर है जिसका नाम है "Caloris Basin"।

- बुध ग्रह पर सबसे लम्बी ढलान 1000 किलोमीटर तक फैली है और उसकी लम्बाई 3 किलोमीटर है।

- बुध ग्रह पर दो प्रकार के सतह है, एक है जो सिर्फ बड़े और लम्बे पहाड़ों से बना है और एक जो और दूसरी जो समतल सीधी गड्ढों से बनी सतह है।

- बुध ग्रह के ध्रुव बिन्दुओं (Polar Region) का तापमान 180 K से ऊपर नहीं रहता, पर उसके भूमध्य रेखा (Equator) का तापमान 700 K तक ऊष्ण रह सकता है।

- सूर्य के सबसे करीब रहने पर भी बुध ग्रह के ध्रुव बिन्दुओं पर जमा हुआ पानी रह सकता है। इसका शोध NASA के भेजे गए उपग्रह MESSENGER ने 29 नवम्बर 2008 में लगाया। बुध ग्रह पर पानी रहने की दो वजह है: एक यह वजह है कि, बुध ग्रह के अंदरूनी हिस्से से पानी बाहर आकर ध्रुव बिन्दुओं पर जमकर रह गया और दूसरी वजह है धूमकेतुओं (Comets) के पथराव के कारण पानी जमकर रह गया।

- बुध ग्रह का वातावरण बहुत कम होने पर भी उसमें Hydrogen, Helium, Oxygen, Sodium, Calcium और अन्य गैसों का समावेश है।

- सूर्य से सौर तूफान आने की वजह से Hydrogen और Helium की मात्रा बुध के वातावरण में तेज़ी से बढ़ जाती है पर बाद में यही Hydrogen और Helium बुध के न्यूनतम तापमान से निकलकर अंतरिक्ष में निकल जाते हैं।


Satellite Sent To Planet Mercury in hindi
बुध ग्रह पर भेजे गए उपग्रह




बुध ग्रह पर 2 उपग्रह (Artificial Satellite) भेजे गए हैं।

1. बुध ग्रह पर जाने वाला पहला उपग्रह Mariner 10 था। NASA ने भेजे गए इस उपग्रह ने अपना सफ़र 1974 से 1975 तक किया। बुध ग्रह के सतह की पहली तस्वीरें भेजने में यह कामयाब हुआ।

Mariner 10 यह पहला ऐसा उपग्रह है जिसने एक की सफ़र में दो ग्रहों को भेंट दी, पहले वह शुक्र ग्रह पर जाकर अपनी गति बदलकर बुध ग्रह तक पहुँचने के अनुकूल बनाई और फिर वह बुध ग्रह तक पहुँचने में यशस्वी हुआ।

बुध ग्रह पर भेट देकर उसने बुध ग्रह की चुम्बकीय गतिविधियों का अभ्यास किया, फिर उसने बुध ग्रह के सतह की फोटो भेजी। पर अंत में उसका ईंधन ख़त्म होने पर उसका सम्पर्क वैज्ञानिकों से टूट गया और आज भी यह माना जाता है कि, Mariner 10 से सम्पर्क टूटने के बावजूद भी वह बुध ग्रह की प्रदक्षिनाएँ काट रहा है।

2. बुध ग्रह पर दूसरा भेजा जाने वाला उपग्रह MESSENGER है। 3 अगस्त 2004 को इसे प्रक्षेपित किया गया, अगस्त 2004 में इसने पृथ्वी की प्रदक्षिणा पूरी की, अक्तूबर 2006 में उसने शुक्र ग्रह को भेंट दी और वहाँ से उसने अपनी प्रदक्षिणा पूरी कर बुध ग्रह के लिए रवाना हुआ।

14 जनवरी 2008 को वह बुध ग्रह तक पहुँच गया। MESSENGER ने अपने मिशन के दौरान बुध ग्रह की सतह और उसके अंदरूनी हिस्सों की पूरी Mapping वैज्ञानिकों तक पहुँचाई। 30 अप्रैल 2015 को उसका मिशन ख़त्म होने पर उसने बुध ग्रह के सतह पर टकराकर अपना मिशन समाप्त किया।

3. 2018 में Bepi Colombo नामक मिशन की शुरुआत यूरोप और जापान की अंतरिक्ष संस्थाएँ मिलकर करेंगी। अनुमानित तौर पर यह उपग्रह 2025 तक बुध ग्रह तक पहुँचेगा। इसमें बुध ग्रह के चुम्बकीय क्षेत्र का अभ्यास करने हेतु और पूरे ग्रह का नक्शा तैयार करने हेतु एसे 2 जाँच करने वाले यंत्र इसके साथ भेजे जाएँगे।





Interesting Facts about Planet Mercury In Hindi बुध ग्रह के बारे में कुछ रोचक जानकारियाँ




- बुध ग्रह के बारे में पहली बार ईसा पूर्व 14 वें शतक में ज्ञात हुआ।

- बुध ग्रह के आसपास कोई भी नैसर्गिक ग्रह (Natural Satellite) नहीं घूमता।

- बुध ग्रह पर आपका वज़न, पृथ्वी के वज़न के हिसाब से 38% हगा।

- बुध ग्रह सौर माला में दूसरा सबसे गरम ग्रह है।

- बुध ग्रह का अंदरूनी मुख्य हिस्सा पिघले हुए लोह से बना है।

- बुध ग्रह के कुछ हिस्सों पर अगर आप रहें तो वहाँ पर आपको सूरज सिर्फ आधा ही उगता और डूबता हुआ दिखेगा।

- बुध ग्रह की सतह हमारे चाँद के सतह जैसी दिखती है।

- बुध ग्रह के आसपास कोई रिंग घूमती नहीं दिखाई देगी।

- बुध ग्रह को अच्छे दूरबीन से सूर्यास्त या सूर्योदय के समय देखा जा सकता है।

- हमारे पृथ्वी में 18 बुध ग्रह समा सकते हैं।

- सूर्य में 1,70,00,000 बुध ग्रह समा सकते हैं।


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