What is S400 and is importance In Hindi

What is S400 and is importance In Hindi...


क्या है एस 400?


यह एक मॉडर्न long-range सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम है जो कि, रसिया के Almaz antey द्वारा विकसित किया गया है। फिलहाल रशिया एस 500 पर काम कर रहा है। एस 400 पर तीन तरह की मिसाइलें होती हैंं जिनकी अपनी अपनी सीमाएँ होती हैंएस 400 दुनिया की सबसे काबिल वायु रक्षा प्रणाली है यह एक साथ 100 से 300 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है। अमेरिका द्वारा विकसित किए गए 35 लड़ाकू विमान तथा ड्रोन मिसाइल तथा अन्य फाइटर प्लेन को यह पल भर में नेस्तनाबूद कर सकता है। आपको बता दें कि, एस 400 की मारक क्षमता 17,000 किलोमीटर प्रति घंटा है जो कि, अन्य सभी लड़ाकू विमानों की अपेक्षा बहुत अधिक है तथा इस सिस्टम को इंस्टॉल करने में कुछ ही मिनट का समय लगता है। एस 400 की रेंज 600 किलोमीटर तथा एल्टीट्यूड 30 किलोमीटर तक 360 डिग्री वायु रक्षा करने में सक्षम है। प्रत्येक एस 400 में 8 मिसाइल लॉन्चर होते हैं तथा एक बार में कई मिसाइलों को लॉन्च किया जा सकता है इसमें एक कमांड सेंटर होता है तथा एक रडार प्रणाली होती है इसमें एक साथ 72 मिसाइलोंं को रखा जा सकता है।

कितने देशों के पास है?

वर्तमान में यह रक्षा प्रणाली केवल 3 देशों के पास है जिनमें चीन रूस तुर्की आदि शामिल है तथा भारत चौथा देश होगा यदि वह इसको खरीद लेता है साथ ही साथ सऊदी अरब भी इस प्रणाली को खरीदने में लगा हुआ है।

क्यों है जरूरत?
कोई भी देश अपनी वायु रक्षा सम्बन्धी सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराता एक सर्वे के मुताबिक पाकिस्तान के पास अमेरिका में निर्मित f-16 लड़ाकू विमानों का बेड़ा है तथा चीन के पास भी लगभग 1,700 विमानों का बेड़ा है इसी को ध्यान में रखते हुए एक बार हमारे एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा था कि, भारत दुनिया के अन्य देशों की अपेक्षा सबसे ज्यादा खतरा महसूस कर रहा है इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने एस 400 को भारतीय सेना में शामिल करने के लिए कदम उठाए अभी हाल ही में रशियन प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इस डील को पूरा कर लिया गया यह डील लगभग 40 हजार करोड़ की है।


कहां पर deploy किया जाएगा?

S-400 को सामरिक महत्व की जगहों पर जैसे कि, दिल्ली तथा पंजाब जिसके जरिए हम पी.ओ.के. को भी प्रोटेक्ट कर सकते हैं तथा मुम्बई गुजरात तथा पूर्वोत्तर भारत में भी लगाया जा सकता है इस सम्बन्ध में भारत सरकार द्वारा अभी विस्तृत जानकारी प्रदान नहीं की गई है परंतु यह सभी स्थान सामरिक महत्व के हैं तथा यहाँ पर सम्भावनाएँ ज्यादा हैं।

क्या है व्यवधान?
एस 400 खरीदने को लेकर अमेरिका से समय-समय पर धमकियाँ मिलती रही हैं यदि हम देखें की चीन द्वारा एस 400 खरीदने पर अमेरिका ने उस पर सैंक्शन लगा दिए थे जो कि, एक बहुत बड़ी इकोनॉमी है अमेरिका चाहता है कि, वह अपने डिफेंस इक्विपमेंट को रिफरेंस दे इस कारण उसने CAATSA (COUNTER AMERICAN ADVERSARIES THROUGH SANCTIONS ACT) कानून बनाया जिसके जरिए यदि कोई भी देश रसिया से डिफेंस इक्विपमेंट खरीदता है तो उस सैंक्शन लगा दिए जाएँगे अमेरिका चाहता है कि, भारत अमेरिका द्वारा निर्मित THAAD (टर्मिनल हाई एटीट्यूड एयर डिफेंस सिस्टम) खरीदे परंतु थॉट s400 के कंपैरिजन में नहीं है।



आगे क्या करेगा भारत?
यदि भारत एस 400 खरीदने में तथा अमेरिका से सेक्शन में छूट पाने में सक्षम होता है तो यह भारत के लिए एक बहुत बड़ी डिप्लोमेटिक जीत होगी अमेरिका ने भी इस ओर संकेत दे दिए हैं कि, भारत को इस सम्बन्ध में छूट दी जा सकती है भारत ने अपना पक्ष जाहिर कर दिया है कि, अमेरिका के द्वारा लगाए गए सैंक्शन को भारत नहीं मानता तथा भारत एक स्वतंत्र एवं सम्प्रभु राष्ट्र है यह केवल यू.एन. के सैंक्शन को मानता है किसी राष्ट्र के नहीं भारत को अपनी विदेश नीति संचालित करने का पूरा अधिकार है।


अन्य देशों का मत-

इस सम्बन्ध में पाकिस्तान कहता है कि, भारत एक रीजनल पावर होते हुए क्षेत्र में शक्ति अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न कर रहा है जो कि, अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है चीन ने भी इस सम्बन्ध में अपनी नाराजगी व्यक्त की है परंतु भारत को अपने हित में सोच कर आगे कदम बढ़ाना चाहिए


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