How Did Lord Buddha Attain Enlightenment Under Tree In Hindi

How Did Lord Buddha Attain Enlightenment Under Tree In Hindi...

गौतम बुद्ध ने पेड़ के नीचे ज्ञान कैसे प्राप्त किया?


Name: Siddhartha, Gautam Buddha, Bhagwan Buddha
Born: 563 AD
Birth place: Lumbini
Died: 480 AD, kushinagar
Father's name: Suddhona
Mother's name: Maya Devi
Achievement: Founder of Biddha



गौतम बुद्ध के विषय में मैंने जो कुछ भी पढ़ा है और उनके बारे में जाना है उस थोड़े से ज्ञान से मैं अपने विचार व्यक्त कर रहा हूँ... 



संसार का ज्ञान प्राप्त करने से पहले राजपुत्र सिद्धार्थ लगभग छह साल तक एक योगी की शरण में थे जो उस समय बहुत माने जाते थे, उन्होंने सिद्धार्थ को योग की शक्ति की पहचान करवाई। आज की भाषा में कहें तो, जिसे doctor, engineer या जो कुछ बनने की इच्छा हो वह विद्यार्थी दसवीं कक्षा से ही तैयारी शुरु कर देता है।


गौतम बुध्द संसार का ज्ञान प्राप्त करने हेतु 6 साल तक भटकते रहे। उनके आखरी गुरु ने उन्हें कहा था कि, आहार से चावल क़े दाने कम करते जाओ, जब एक दाने पर आओगे तब तुम्हें ज्ञान की प्राप्ति होगी। ज्ञान पाने की लालसा में बुद्ध ने वैसा ही किया जैसा उनके गुरु ने बताया था। वे शारीरिक रूप से बहुत weak हो गए थे, उनका पूरा शरीर बस एक हड्डियों का ढाँचा बन कर रह गया था, उनकी चमड़ी उनकी हड्डियों से चिपक गई थी।




एक दिन वे नदी पार कर दूसरी छोर जा रहे थे लेकिन जैसे ही वे नदी की मुख्य धारा में आए, कमजोर शरीर होने के कारण वे बहने लगे। बहुत कोशिश के बाद एक पत्थर को पकड़कर उन्होंने अपनी जान बचा ली और वे थके-हारे आज के बिहार राज्य में स्थित बोधगया में एक पीपल के पेड़ के नीचे जा बैठे। बैसाखी पूर्णिमा की बात है। इस नगर की सुजाता नाम की एक वधु को बड़ी मन्नतों के बाद पुत्र की प्राप्ति हुई थी। पुत्र प्राप्ति के ख़ुशी में सुजाता गाँव के सभी देवी-देवताओं को दूध-चावल की बनी खीर का भोग देने आई थी। सिद्धार्थ का कमज़ोर शरीर देखकर उसे बड़ी दया आई। खीर का पात्र सिद्धार्थ के सामने रखते हुए न चाहते हुए भी उसके मुख से शुभकामना निकल पड़ी कि, “जैसे मेरी कामना पूरी हुई हैं वैसे ही तुम्हारी भी हो”।


खीर का सेवन करने के बाद सिध्दार्थ के तन-मन में आत्म-तृप्ति का आभास हुआ और उन्हें भूख के महत्व का ज्ञान हुआ। कमजोर शरीर को ऊर्जा प्राप्त हुई तो उन्हें energy का ज्ञान हुआ, तब उन्होंने संकल्प किया कि, अब जियूँ या मरुँ जब तक ज्ञान की प्राप्ति नहीं होगी इस जगह को त्याग कर नहीं करुँगा और चिंतन के साथ समाधि लगाई। सिद्धार्थ समाधी की अवस्था मे 7 सप्ताह यानि 49 दिनों तक बिना भोजन के meditation में रहे। 49 दिनों के बाद उन्हें पलक झपकने में जितना समय लगा उससे भी कम समय में सिद्धार्थ को ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे गौतम बुद्ध बन गए।

The science of meditation in Hindi 

अब थोड़ा science की नज़र से देख लेते हैं, Meditation करने से हम एक नए dimension (आयाम) में चले जाते हैं, क्योंकि मन बहुत चंचल है यह केवल एक ही पल में कहीं भी चला जाता हैइसलिए meditation से हम अपने मन को एकाग्र करने की कोशिश करते हैं। mediation करते समय हमें अपनी साँसों को control करना होता है और ध्यान लगाना होता है कि, वायु हमारे शरीर के भीतर कैसे प्रवेश करती है और कहाँ तक जाती है? इंसान की normal breathing rate 15 से 16 per minute होती है और इसे कम करके इंसान को breathing rate को 7-8 per minute पर लाया जाता है इस से हमारे मस्तिष्क में pure oxygen का प्रवाह होता है जिस से हमारा मस्तिष्क सही से कार्य करने लगता है और हम पहले से अच्छी तरह चीजों को समझने लगते हैं, उन पर विचार करते हैं, breathing exercise से शरीर में होने वाली ageing process भी slow होती है, गुस्सा नहीं आता, मन किसी भी काम में लगता है और आयु भी लम्बी होती है। हम धीरे-धीरे मन को स्थिर करने लगते हैं और वेदों में भी लिखा है जिसने मन को नियंत्रित कर लिया उसने संसार का ज्ञान हासिल कर लिया।


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